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Home remedies by Dr.Suresh Agarwala

मंडूकपर्णी (Beng Saag) के गुण अनेक, चर्म रोग हो तो खाकर देख

मंडूकपर्णी भारत ही नहीं, विश्व के अनेक देशो में सैकड़ों वर्षों में उपयोग में लाया जाने वाला वनस्पति है। यह एक लता है, जो भूमि पर तैजी से फैलता है और पानी की प्रचुरता में बारहों महीने हरी-भरी रहती है। यह अक्सर तालाब या खेत के किनारे पायी जाती है। गुर्दे के आकार के इसके पत्ते आधे से दो इंच के होते हैं। पत्तियों के किनारे गोल दांतेदार होते...

जो माता शतावर अपनाये, शिशु को खूब दूध पिलाये

शतावर आयुर्वेद की रसायन जड़ी-बूटियों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह भारत के सभी राज्यों के जंगल में, हिमालय की चार हजार फुट की ऊंचाइयों तक बहुतायत में पायी जाती है। झारखंड के जंगलों में भी यह अच्छा मात्रा में उपलब्ध है। इसके बेलनुमा ऊपर चढ़नेवाली लताएं कांटेदार होती हैं। इसकी शाखाएं-प्रशाखाएं चारों ओर फैली होती हैं। इसके छोटे-छोटे...

हरश्रृंगार का काढ़ा आजमाओ, साइटिका को दूर भगाओ

हरश्रृंगार एक 15 से 20 फूट ऊंचा वृक्ष है, जो लगभग पूरे साल हरा-भरा रहता है। इसके पेड़े स्वाभाविक रूप से प्रायः सभी राज्यों में पाये जाते हैं। मनमोहक सुगंधित फूलों के कारण इसे आम तौर पर घर के बगीचे में भी लगाते हैं। इसकी पत्तियां दो से तीन इंच लंबी, एक-दो इंच चौड़ी लगभग हृदयाकार नुकीली और अत्यधिक रुखड़ी सतह वाली होती है, जिसके किनारे...

जमा हो बदन में ज्यादा पानी- खाओ पुनर्नवा, कहते हैं ज्ञानी

पुनर्नवा आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान की एक महत्वपूर्ण वनौषधि है। पुनर्नवा के जमीन पर फैलने वाली छोटी लताओं जैसे पौधे बरसात में परती जमीन पर, कूड़े के ढेर पर, सड़कों के किनारे जहां-तहां स्वयं उग आते हैं। गर्मियों में यह प्रायः सूख जाते हैं, पर वर्षा में पुनः इसकी जड़ों से शाखाएं निकलती हैं। पुनर्नवा का पौधा अनेक वर्षों तक जीवित रहता है।...

पुरानी खांसी दूर भगाओ, घर में छोटी पिप्पली लाओ

पिप्पली या छोटी पीपल अनेक औषधीय गुणों से संपन्न होने के कारण आयुर्वेद की एक प्रमुख और प्रतिष्ठित दवा है। आम जनमानस में यह गरम मसाले की सामग्री के रूप में भी जाना जाता है। पिप्पली की कोमल तनों वाली लताएं 1-2 मीटर तक जमीन पर फैलती हैं। इसके गहरे हरे रंग के चिकने पत्ते 2-3 इंच लंबे और 1-3 इंच चौड़े हृदय के आकार के होते हैं। कच्चे फलों का रंग...

चाहे जैसा हो बुखार, कालमेघ दे उसे उतार

कालमेघ का परिचय कालमेघ भारत के लगभग सभी राज्यों के जंगलों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके एक से तीन फीट के ऊंचे पौधे में अनेक पतली-पतली शाखाएं होती हैं। इसका मुख्य तना एवं शाखाएं चौपहल होती हैं। इसकी पत्तियां मालाकार तीन से चार इंच लंबी एवं एक से सवा इंच चौड़ी होती हैं। इसके फूल हल्का गुलाबी रंग लिये सफेद होते...

ब्राह्मी का सेवन करो हर रोज, बढ़ेगा जीवन का ओज

ब्राह्मी आयुर्वेद के ग्रंथों में वर्णित एक अत्यंत उपयोगी और गुणकारी पौधा है। यह लता के रूप में जमीन पर फैलता है। इसके पतले-पतले कोमल तने एक से तीन फीट लंबे होते हैं, जिसपर थोड़ी-थोड़ी दूर पर गांठें होती हैं। इन गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में चली जाती हैं और उससे भी अलग शाखाएं और पत्ते निकलते हैं। शाखाओं की लंबाई चार से बारह इंच तक होती...

कोविड 19 से बचाव और इसकी चिकित्सा में सहायक हो सकता है...

Dr.Suresh Kumar Agarwalla | Sep 10 '20 |

Tagged under: amrita, corona, ayurved, giloy, tulsi
डॉ. सुरेश कुमार अग्रवाल कोरोना वायरस नाक या मुंह के रास्ते पहले श्वास नली में दाखिल होता है। फिर, फेफड़ों को प्रभावित करता है और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने की कोशिश करता है।   हमारे शरीर में अगर प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता हो तो इसकी बदौलत शरीर में कोरोना वायरस का प्रसार रोकने और परास्त करने में मदद मिलती है। अगर अपने...

बुखार : शत्रु या मित्र

चिकित्सक के पास या अस्पतालों में आने वाले रोगियों में एक बड़ी संख्या में उनकी होती है, जो बुखार की शिकायत लेकर आते हैं। इनमें दो-चार या दस दिनों से हल्के या तेज बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या ही अधिक होती है पर कुछ कई सप्ताह से बुखार की शिकायत बताते हैं। हालांकि बुखार के साथ-साथ अक्सर कम या अधिक अन्य तकलीफें जैसे खांसी, पेशाब की जलन, शरीर...

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